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Showing posts from April, 2025

042 जानिए खटिया पर सोने के फायदे, जिसके कारण इतनी महंगी बिक रही है

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  जानिए खटिया पर सोने के फायदे, जिसके कारण इतनी महंगी बिक रही है ऑस्ट्रेलिया में डेनियल नाम का एक आदमी भारत की देसी खटिया ९९० ऑस्ट्रेलियन डॉलर ( हमारे ६२ हजार रुपए) में बेच रहा है और हम है कि इसे आउट ओफ फॅशन मान कर इसकी खटिया खडी कर रहे हैं । इसके फायदे फॅशन के आगे बौने बन गए हैं । सोने के लिए खटिया हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है । हमारे पूर्वजों को क्या लकडी को चीरना नही आता होगा? वो भी लकडी चीरके उसकी पट्टीयां बना कर डबल बॅड बना सकते थे । डबल बॅड बनाना कोइ रोकेट सायंस नही है । लकडी की पट्टीयों को किलें ही ठोकनी होती है । खटिया भी भले कोइ सायन्स नही हो लेकिन एक समजदारी है कि कैसे शरीर को अधिक आराम मिल सके । खटिया बनाना एक कला है उसे रस्सी से बूनना पडता है और उस में दिमाग लगता है । जब हम सोते हैं तब माथा और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की जरूरत होती है क्योंकि रात हो या दोपरहर हो लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते थे । पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की जरूरत होती है । इसलिए सोते समय खटिया की जोली ही इस स्वास्थ का लाभ पहुंचा सकती है । दुनिया में जीतनी भी आरामकुुर्सियां देख लो उ...

041 जो मशीन जापान 60-70 लाख में देता है, इस शख्स ने उसको मात्र 90 हजार में बना दिया

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  जो मशीन जापान 60-70 लाख में देता है, इस शख्स ने उसको मात्र 90 हजार में बना दिया राजीव भाई हमेसा कहते थे कि अमेरिका को ये भी मालूम है कि भारत के पास उनसे ज्यादा वैज्ञानिक है, डॉक्टर है, इंजीनियर है। भारत से ज्यादा वैज्ञानिक एक ही देश में है वो है चीन। भारत में ए केटेगरी के साइंटिस्ट की संख्या 60,000 है और अमेरिका में यही 12 या 13 हजार के आसपास है। हमारे देश में तो कुछ ऐसे भी दिमाग वाले लोग है जो उच्चत क्वालिटी के टेकनीकल दिमाग वाले है जिनसे अमेरिका और ज्यादा परेसान रहता है, भारत में कुछ ऐसे दिमाग है अगर आप उनको एक बार मशीन खोलकर दिखा दो तो वही मशीन वो खुद बनाकर आपको बेच देंगे, इस तरह के बहुत दिमाग है इस देश में। और ऐसा दिमाग भारत में उल्लास नगर एरिया में सबसे ज्यादा रहता है जिनको आप एक बार कोई मशीन दिखाओ और फिर वही मशीन आप उनसे बनवा लो। अभी कुछ लोग इसको मजाक मानते है कुछ लोग कहते है इसमे क्या है नक़ल ही तो करना है लेकिन उनको ये नहीं मालूम कि नक़ल करने के लिये भी अकल लगती है, अगर ये आसान होता तो सब क्यों नहीं कर लेते ये नक़ल। अगर आपको कोई एक मशीन खोलकर दे दी तो आप वही दूसरी नही बना पा...

040 ये अंग्रेज भारत की सबसे बड़ी खोज ले गया था

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  ये अंग्रेज भारत की सबसे बड़ी खोज ले गया था 1710  में  डॉक्टर ऑलिवर  भारत में आया और पूरे बंगाल में घूमा. उसके बाद वो अपनी डायरी में लिखता है,”मैंने भारत में आकार ये पहली बार देखा कि चेचक जैसी महामारी को कितनी आसानी से भारतवासी ठीक कर लेते हैं.” चेचक उस समय यूरोप के लोगों के लिए महामारी ही थी. इस बीमारी से लाखों यूरोपवासी मर गए थे. उस समय में वो लिखता है कि यहाँ लोग  चेचक के टीके  लगवाते हैं. वो लिखता है कि,”टीका एक सुई जैसी चीज़ से लगाया जाता था. इसके बाद तीन दिन तक उस व्यक्ति को थोड़ा बुखार आता था. बुखार ठीक करने के लिए पानी की पट्टियां रखी जाती थीं. तीन दिन में वो व्यक्ति ठीक हो जाता था. एक बार जिसने टीका ले लिया वो ज़िंदगी भर चेचक से मुक्त रहता था. फिर ये डॉक्टर वापस लन्दन गया. डॉक्टरों की सभा बुलाई. सभा में भारत में चेचक के टीके की बात बताई. जब लोगों को यकीन नही हुआ तो वो उन सभी डॉक्टरों को अपने खर्च पर भारत लाया. यहाँ उन लोगों ने भी टीके को देखा. फिर उन लोगों ने भारतीय वैद्यों से पूंछा कि इस टीके में क्या है? तो उन वैद्यों ने बताया कि जो लोग चेचक के रोगी...

039 सारी दुनिया को सर्जरी की देन भारत ने दी, जाने इसका इतिहास

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  सारी दुनिया को सर्जरी की देन भारत ने दी, जाने इसका इतिहास आयुर्वेद के नियम हजारों साल पहले आयुर्वेद चिकित्सा के कुछ महान व्यक्तियों ने बांये हुए है. हमारी आयुर्वेद चिकित्सा में एक बड़े महान व्यक्ति हुए, जिनका नाम था महर्षि चरक. इन्होने सबसे ज्यादा रिसर्च इस बात पर किया कि जड़ी बूटियों से क्या क्या बीमारियाँ ठीक होती है या पेड़ पोधों से कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है. पेड़ों के पत्तों से कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है, उस पर उन्होंने सबसे ज्यादा रिसर्च किया. उसके बाद एक और ऐसे ही व्यक्ति हुए महर्षि शुश्रुक उन्होंने इस पर काम किया कि शरीर के किसी भी अंग में जरुरत से ज्यादा ऐसी कोई ग्रोथ या बढोतरी हो जाए, जैसे ट्यूमर या गाँठ हो गयी इसको कैसे काट कर निकला जाए. उन्होंने सर्जरी पर सबसे ज्यादा काम किया. आपको शायद ये जानकर आश्चर्य होगा और ख़ुशी भी होगी कि सर्जरी का अविष्कार इसी देश में हुआ. यानी भारत में हुआ, सारी दुनिया ने सर्जरी भारत से सीखी. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मिनी ने यहीं से सर्जरी सीखी, अमेरिका में तो बहुत बाद में आयी सर्जरी. और ब्रिटेन ने भारत से 400 साल पहले सर्जरी सीखी. ब्रिटेन के डॉक्टर...

038 त्योहारों में बनने वाले भोजन के पीछे बहुत ही अदभुत वैज्ञानिक कारण होते है, जानिए

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  त्योहारों में बनने वाले भोजन के पीछे बहुत ही अदभुत वैज्ञानिक कारण होते है, जानिए हमारे हिंदुस्तान में तीज त्योंहार होते रहते हैं और हर तीज त्योंहार पर खास तरह के व्यंजन और पकवान बनाये जाते है हर त्योंहार में कुछ खास तेल का उपयोग हो रहा है दुसरे तरह के त्योंहार में दुसरे तरह का तेल उपयोग हो रहा है इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है वो विज्ञानं ये है जैसे की फाल्गुन और चेत्र के महीने के त्योंहार जैसे होली पर जो जो पकवान बन रहे हैं तो मौसम के हिसाब से वो बहुत अनुकूल हैं दिवाली के आसपास के जो तीज त्योंहार है वो अलग तरह की प्रीपरेशन से तैयार पकवान हैं इनके पीछे एक अलग ही वैज्ञानिक कारण हैं ये हमारे शरीर को अलग अलग तरह से मदद करने वाले हैं हमारे देश के ऋषि महारिशियों ने ये देखा की ठंड के दिनों में किस चीज का प्रकोप(वात, पित्त, कफ,) ज्यादा है बरसात के दिनों में किस चीज का प्रकोप ज्यादा है गर्मी के दिनों में किसका प्रकोप ज्यादा है इन प्रकोपों से बचने के लिए जिस मौसम में जो चीज प्रकृति ने हमें दी है उसी चीज को उन्होंने इन व्यंजनों और पकवानों में डाला है. जैसे सर्दियों के दिनों म...

037 हिमालय के योगियों की इन ‘अद्भुत शक्तियों’ ने बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को भी कर दिया हैरान

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  हिमालय के योगियों की इन ‘अद्भुत शक्तियों’ ने बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को भी कर दिया हैरान कई प्राचीन घटनाओं के माध्यम से यह ज्ञात है कि विभिन्न क्रिया-कलापों के निरंतर प्रयासों से मनुष्य असाधारण शक्तियां हासिल करने का सामर्थ्य रखता है। इन घटनाओं पर आधारित कई किस्से आज भी हमारे साहित्य के भीतर मौजूद हैं, लेकिन पाठकों के लिए वे सिर्फ कहानियाँ हैं। इसी कड़ी में हिमालय और वहां के योगियों की अद्भुत चमत्कारिक शक्तियों ने वैज्ञानिकों का भी ध्यान आकर्षित किया है। प्रोफेसर हर्बर्ट बेन्सन के नेतृत्व में हार्वर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने इन रहस्यमय परतों का पर्दाफ़ाश करने हिमालय की ओर निकल पड़े। ख़ैर यह घटना 20 साल पहले की है लेकिन इसके नतीज़े वाक़ई हैरान करने वाले हैं। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों के निष्कर्षों ने हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म के बीच श्रेष्ठ धर्म को लेकर एक नया विवाद पैदा कर दिया है। हालांकि अन्य धर्मों की तरह इन दोनों धर्मों की भी महानता और श्रेष्ठता पर टिप्पणी करना पूरी तरह अनुचित है। सच यह भी है कि बौद्ध धर्म की उत्पत्ति हिन्दू धर्म से ही हुई है। किन्तु पश्चिमी दुनिया में इसे ले...

036 मिलिए हिमाचल की जांबाज बेटी पूनम नेगी से, खतरनाक सड़क पर बेधड़क चलाती है ट्रक

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मिलिए हिमाचल की जांबाज बेटी पूनम नेगी से, खतरनाक सड़क पर बेधड़क चलाती है ट्रक दुनिया के सबसे खतरनाक हाइवे पर जहां लोगों को पैदल चलते हुए भी डर लगता है और वहां से गुजरने में कतराते हैं। उन्हीं सड़कों पर 23 साल की पूनम हैवी ट्रक दौड़ाती है। दुनिया के सबसे खतरनाक हाइवे में से एक शिमला-किन्नौर हाइवे पर पूनम ने हैवी व्हीकल दौड़ाने में महारत हासिल कर रखी है। पूनम ने रामपुर से रारंग तक का सफर 6 घंटे में पूरा किया। रारंग तक के सफर पर कई ऐसे भी स्थान थे जहां पर सिंगल रोड होने की वजह से आगे से गाड़ी आ जाने पर काफी पीछे हटकर पास देना पड़ा। इस सफर के दौरान उन्होंने 8 हजार मीटर उंचाई वाले क्षेत्र में भी गाड़ी चलाई है। पूनम के रारंग सही सलामत पहुंचने पर गांव के लोगों ने उसका स्वागत किया और उसके प्रयासों की खूब सराहना की। वहीं अब पूनम की खतरनाक सड़कों पर ड्राइविंग का वीडियो सोशल मीडिया और यू ट्यूब पर वायरल हो गया है और अभी तक 10 हजार लोगों ने इसे यू ट्यूब में देखा है। तीन बहनों और दो भाईयों में सबसे बड़ी है पूनम –  पूनम ने बताया कि वह 2011 से ड्राइविंग कर रही हैं. बारहवीं के बाद कंप्यूटर में डिप्...

035 इस गुरूकुल में तैयार हो रहे हैं गूगल बच्चे, छात्र गणित में बना विश्वविजेता

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  इस गुरूकुल में तैयार हो रहे हैं गूगल बच्चे, छात्र गणित में बना विश्वविजेता याद हो तो कुछ समय पहले एक बच्चा टीवी पर छाया हुआ था। हरियाणा का कोटिल्य पंडित गूगल बॉय। लेकिन किसी ने ये नहीं बताया कि ये एक ऐसे गुरूकुल में तराशा गया जहां सैंकड़ों बच्चे असीमित प्रतिभा से लैस हैं। अभी कुछ दिन पहले सुना कि साबरमती के इसी गुरूकुल का छात्र तुषार तलावट गणित में विश्वविजेता बन गया। हमारी टीम तुषार से कुछ पिछले महीने ही मिली थी। हर केलकुलेटर फेल है उसकी स्पीड के सामने। 50 जटिल सवाल ढाई मिनट में हल कर दिखा दिए उसने। वैदिक आधारित शिक्षा दे रही इस संस्कृत पाठशाला में गढ़े जा रहे बच्चों से मिलने देश विदेश से दर्जनों युवक युवतियां आए थे. जिनका मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से मोहभंग हो चुका है। आखिर ऐसा क्या है हमारी वैदिक शिक्षा पद्धति में कि सबको पछाड़ने और चुनौती देने की क्षमता रखते हैं ये बच्चे। तुषार और गूगल बॉय जैसे दर्जनों मिले। न फास्टफूड, न टीवी, न इंटरनेट। पढ़ाई के बाद कोई डिग्री भी नहीं। लेकिन हर फन में माहिर। हर काम में अव्वल। अनुशासन, कुशाग्रता, एकाग्रता, याद रखने और गणना करने की क्षमता, काम की गत...

034 यहाँ तैयार हो रहे है भविष्य के ‘अर्जुन’, जीत चुके हैं सैकड़ों गोल्‍ड मेडल

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  यहाँ तैयार हो रहे है भविष्य के ‘अर्जुन’, जीत चुके हैं सैकड़ों गोल्‍ड मेडल मेरठ के एक छोटे से गांव टीकरी के जंगल में गंगनहर के किनारे स्थित गुरुकुल प्रभात आश्रम में भविष्य के अर्जुन तैयार किए जा रहे हैं। यहां पढ़ रहे छात्र न केवल विद्या में निपुण हो रहे हैं, बल्कि धनुर्विद्या में भी आश्रम और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। इस आश्रम से धनुर्विद्या सीख चुके दो धनुर्धर ओलंपिक तक खेल चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में धनुर्धर गोल्ड और अन्य मेडल लाकर नाम रोशन कर चुके हैं। वर्तमान में भी कई खिलाड़ी आश्रम में शांतचित माहौल में ओलंपिक की तैयारी में जुटे हैं। संसाधनों के अभाव के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय धनुष प्रतियोगिता में आश्रम और देश का नाम रोशन करने के लिए यहां के खिलाड़ियों में जोश और जज्बे में किसी तरह की कमी नहीं दिखती। इस विडियो में देखिए कैसे तैयार हो रहे है भविष्य के अर्जुन >> लकड़ी के धनुष से शुरू किया था प्रशिक्षण  गुरुकुल प्रभात आश्रम में धनुर्विद्या का अभ्यास वर्ष 1993 में शुरू किया गया। यह निर्णय प्रभात आश्रम के संत शिरोम...

033 11वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने बनाया सोलर एनर्जी वाला AC, बिना बिजली के चलेगा

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  11वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने बनाया सोलर एनर्जी वाला AC, बिना बिजली के चलेगा कहते हैं टैलेंट गांव और कस्बों में ही बसता है. यूपी के झांसी में रहनेवाली 11वीं की छात्रा कल्याणी ने मिनी एसी बनाकर सबको चौंका दिया है. 100 रुपए की लागत से बना ये एसी गांव के लोगों की जरुरत के हिसाब से बनाया गया है. खास बात ये है कि ये एसी सोलर एनर्जी से चलता है. कल्‍याणी की उपलब्धि ने देश ही नहीं दुनिया में शोहरत बटोरी है. मिनी एसी की तकनीकी जानने के लिए कल्याणी को जापान सरकार ने मिलने के लिए बुलाया है. इस विडियो में देखिए >> कैसे काम करता है एसी :  कल्याणी ने इस मिनी एयर कंडिशनर को गांव के लोगों की जरुरत के हिसाब से बनाया है. सोलर एनर्जी से चलनेवाला यह एसी पूरी तरह से पल्युशन फ्री है. कल्याणी के मुताबिक थर्माकोल से बने आइस बॉक्स में 12 बोल्ट के डीसी पंखे से हवा दी जाती है. एल्बो से ठंडी हवा निकलती है. इसे एक घंटा चलाने पर टेम्प्रेचर में चार से पांच डिग्री का फर्क आता है. शिक्षा :  कल्याणी श्रीवास्तव लोकमान्य तिलक इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा की स्‍टूडेंट है. कल्याणी ने कुछ दिन पहले इ...

032 भारत के इस युवा लड़के के आगे अमेरिका भी नतमस्तक, सभी युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत, जाने क्यों

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  भारत के इस युवा लड़के के आगे अमेरिका भी नतमस्तक, सभी युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत, जाने क्यों हम बात कर रहे है गुजरात के रहने वाले प्रणव मिस्त्री की. आखिर ऐसा क्या विशेष किया है प्रणव मिस्त्री ने जिसके के कारण आज वे युवाओं के आदर्श कहलाने लगे है. आइये जानते है..प्रणव मिस्त्री एक कंप्यूटर वैज्ञानिक और आविष्कारक है प्रणव का जन्म 14 मई 1981 को पालनपुर, गुजरात में हुआ. वर्तमान में प्रणव सैमसंग के ग्लोबल वाईस प्रेसिडेंट ऑफ़ रिसर्च है और सैमसंग के थिंक टैंक के प्रमुख भी है. इससे पहले प्रणव गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और नासा के लिए भी कार्य कर चुके है. इस विडियो में देखिए प्रणव की अब तक की जर्नी >> गुजराती माध्यम में पढ़े प्रणव एक सामान्य विद्यार्थी की तरह ही थे, स्कूल की पढाई के बाद उन्होंने अहमदाबाद में निरमा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया उसके बाद आईआईटी मुंबई से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की. इसके बाद सफ़र शुरू हुआ एक ऐसे आविष्कार का जो आने वाला समय बदल देगा. एक ऐसा अविष्कार जिसमे किसी विशेष हार्डवेयर डिवाइस की आवश्यकता नहीं होगी. बिन कीबोर्ड, माउस और एलसीडी के भी आप कंप्यूटर का ...

031 ये विडियो बताएगा कि भारत मात्र कृषिप्रधान देश नही रहा है विज्ञानं और तकनिकी में भी सर्वश्रेष्ठ था

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  ये विडियो बताएगा कि भारत मात्र कृषिप्रधान देश नही रहा है विज्ञानं और तकनिकी में भी सर्वश्रेष्ठ था दोस्तों हमें इतिहास में हमारे देश के प्रति नकारात्मक चीजे पढाई गई, जिससे हमारे दिल में अपने देश के प्रति हीन भावना पैदा हो, पहले मुगलों ने फिर अंग्रेजो ने इतिहास के साथ छेड़ छाड़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ा, जिसको जब मौका मिला उसने इतिहास के साथ छेड़ छाड़ की और देश को लूटा. भारत के गौरवशाली इतिहास को हमसे छिपाया गया, जिसे आप भारत का स्वर्णिम अतीत भी कहे तो गलत नहीं होगा. टीवी चैनल पर चल रहे एक धारावाहिक में उस अतीत के एक हिस्से को दिखाया गया जिसमे पेशवा बाजीराव जी एक विदेशी को ऐसा जवाब देते है कि भारत और उसकी महानता जानकर उस विदेशी की आंखे खुली की खुली रह गई 032  भारत के इस युवा लड़के के आगे अमेरिका भी नतमस्तक, सभी युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत, जाने क्यों   https://atulya-bharat-odisha.blogspot.com/2025/04/032.html इस विडियो को जरुर देखे >> इस विडियो में भाई राजीव दीक्षित जी से सुनिए कि भारत के विश्व को क्या क्या दिया है >> इस विडियो में भाई राजीव दीक्षित जी से ...

030 7 FACTS: इन मामलों में पावरफुल देशों को भी टक्कर देता है भारत

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  7 FACTS: इन मामलों में पावरफुल देशों को भी टक्कर देता है भारत एक अरब से भी ज्यादा जनसंख्या वाला देश है भारत। अभी भी डेवलपिंग नेशन्स में गिने जाने वाले इस देश में काफी कमियां मौजूद हैं। लेकिन ऐसे भी कुछ मामले हैं, जिनमें कई ताकतवर देश भारत से पीछे हैं। इंटरनेट यूजर्स के मामले में दुनिया के दूसरे स्थान पर है इंडिया.. अगर ये कहा जाए कि भारतीयों का फ्यूचर इंटरनेट के हाथों में है तो शायद गलत नहीं होगा। चीन के बाद दुनिया के सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर्स भारत में हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 35 करोड़ 40 लाख लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इस मामले में भारत US, जापान और रूस से भी आगे है। भारत ने इसमें अमेरिका को तब पीछे किया है जबकि यहां बाकी देशों के मुकाबले इंटरनेट की अवेलेबिलिटी काफी कम है।  आईए देखते है ऐसे मामले जिनमें कई ताकतवर देश भारत से पीछे हैं न्यूक्लियर हथियार  सिर्फ 66 सालों के अंदर भारत परमाणु शक्ति बन गया है। थोरियम आधारित रिएक्टर्स बनाने के मामले में भारत को पहला स्थान मिला है। इसके अलावा भारत में 7 न्यूक्लियर पावर प्लांट्स हैं, जिनमें फिलहाल 21 रिएक...

029 आठवीं फेल इस छात्र के इशारे पर चलती है सीबीआई, रिलायंस और अमूल जैसी कंपनी

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  आठवीं फेल इस छात्र के इशारे पर चलती है सीबीआई, रिलायंस और अमूल जैसी कंपनी यह बात कई बड़ी हस्तियों से सुनी जा चुकी है कि पढ़ाई में असफल होने का मतलब यह नहीं है कि आप जीवन में कुछ कर नहीं सकते. इसका ताजा उदाहरण पेश किया 22 वर्ष के त्रिशनित अरोड़ा, जिन्होंने महज 22 साल की उम्र में करोड़ों का कारोबार किया. त्रिशनित पेशे से एक एथिकल हैकर हैं, आइए जानते हैं आखिर कैसे 12 तक पढ़े त्रिशनित आज भारत में बेहद मशहूर हैं. क्या काम करते हैं त्रिशनित त्रिशनित एक एथिकल हैकर हैं. एथिकल हैकिंग में नेटवर्क या सिस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी इवैल्युएट की जाती है. सर्टिफाइड हैकर्स इसकी निगरानी करते हैं, ताकि कोई नेटवर्क या सिस्टम (कम्प्यूटर) इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी तोड़कर कॉन्फिडेन्शियल चीजें न तो उड़ा सके और न ही वायरस या दूसरे मीडियम्स के जरिए कोई नुकसान पहुंचा सके. 8वीं क्लास में फेल हुए त्रिशनित त्रिशनित को शुरू से ही कम्प्यूटर में रुचि थी, इसके चलते वे दूसरे सब्जेक्ट्स पर ध्यान भी नहीं दे पाते थे. आठवीं कक्षा के दौरान अरोड़ा की रुचि एथिकल हैकिंग में इतनी जागी कि वे इसमें मग्न हो गए और ...

028 इस वैज्ञानिक ने किया साबित, न्यूटन का ‘तीसरा’ नियम है गलत

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  इस वैज्ञानिक ने किया साबित, न्यूटन का ‘तीसरा’ नियम है गलत हिमाचल के वैज्ञानिक का न्यूटन के गति के तीसरे नियम को गलत साबित कर दिया है। 17 साल पहले इस पर किए गए अपने शोध के सहारे उन्होंने गति तीसरे नियम को गलत बताया था। आखिर कार 17 साल के बाद नासा ने इसकी पुष्टि कर दी। हाल ही में नासा की इगलवक्र्स लैबोरेटरी, हाऊसटन अमेरिका के प्रयोगों में न्यूटन का तीसरा नियम गलत पाया गया है। यह प्रयोग हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक अजय शर्मा की 17 वर्ष पुरानी रिसर्च के लिए वरदान साबित हो सकता है। शर्मा ने 1999 में छपे शोध पत्र में न्यूटन के तीसरे नियम को पहले ही संशोधित किया था। अभी तक माना जाता रहा हैं कि जब आतिशबाजी को आग लगाते है गैस और धुंआ पीछे निकलता है। आतिशबाजी आगे जाती है इसे क्रिया मानते हैं तो प्रतिक्रिया के रूप में धुंआ पीछे जाता है। इस तरह क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर होती है। अत: न्यूटन को 311 वर्ष पुराना नियम सही है। अन्तरिक्ष में जाने वाले स्पैसक्राफट का भी यही सिद्धान्त है। अजय शर्मा के अनुसार प्रतिक्रिया, क्रिया से कम या ज्यादा भी हो सकती है। न्यूटन ने गति का तीसरा निय...

027 भारत के वैज्ञानिक की यह खोज पूरे कंप्यूटर जगत को बदलकर रख देगी

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  भारत के वैज्ञानिक की यह खोज पूरे कंप्यूटर जगत को बदलकर रख देगी मेरठ : वर्तमान में कंप्यूटर और आईटी जगत में भारतीयों के टैलेंट का डंका पूरी दुनिया में बजता है। मेरठ का एक युवा वैज्ञानिक भी ऐसे कण की खोज में लगा है जो पूरे कंप्यूटर जगत को बदलकर रख देगा। मेरठ का युवा वैज्ञानिक अमेरिका में इस कण की दहलीज पर पहुंच गया है। अगर यह कण मिला तो सेंट्रल सर्वर से पूरी दुनिया कनेक्ट हो सकेगी। अंतरिक्ष विज्ञान, रेलवे, एविएशन, दूरसंचार, सेटेलाइट, बिजनेस, पर्यटन एवं विज्ञान में अनुसंधान की नई क्रांति आ जाएगी। परतापुर गांव के सत्तन सिंह के पुत्र राजकुमार ने मुंबई आइआइटी से मैटेरियल साइंस में एमटेक करने के बाद अमेरिका की नार्थ कैरोलिना विवि में ट्रापोलोजिकल इंसुलेटर पर काम शुरू किया। इसमें जादुई मावरान कण मिल सकता है, जिससे कंप्यूटर की गति एक हजार गुना से ज्यादा तेज हो जाएगी। इसके लिए उनके प्रोजेक्ट को दुनियाभर में सराहना मिल चुकी है। वह बिस्मतसैलेनाइड मेटल पर सुपर कंडक्टर की परत चढ़ाकर उसमें मावरान कण की खोज में जुटे हैं। यह कण 70 वर्ष पहले एक वैज्ञानिक द्वारा चर्चा में आया, जब पता चला कि इसमें प...

026 स्कूल दूर था, ऐसे में छात्रा ने बनाई हवा से चलने वाली साइकिल

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  स्कूल दूर था, ऐसे में छात्रा ने बनाई हवा से चलने वाली साइकिल ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’, ये वाक्य तो काफ़ी प्रचलित है. अगर इसी वाक्य को ऐसे कहें कि ‘मज़बूरी भी आवश्कता की जननी है,’ तो कहना गलत ना होगा. इस बात को यथार्थ करने के लिए हम आपको एक स्टोरी से रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं. सभी बच्चों की चाहत होती है कि वो स्कूल जाएं, मगर उसकी ये चाहत नहीं होती है कि वो दूर पैदल चल कर स्कूल जाए. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी देश में कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें साइकिल से स्कूल जाना पड़ता है. गर्मी हो या बरसात, हर समय में साइकिल में पैडल मारना पड़ता है. सभी बच्चों की तरह ओडिशा की 14 साल की छात्रा तेजस्विनी प्रियदर्शनी भी साइकिल से स्कूल जाती थी. स्कूल दूर होने के कारण वो काफ़ी थक जाती थी. ऐसे में उसने एक ऐसी साइकिल की खोज की, जो बिना पैडल की है. यह एक ऐसी साइकिल है, जो हवा से चलती है. यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, मगर ये शत-प्रतिशत सच है. राउरकेला के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की 11वीं की छात्रा तेजस्विनी की खोज से पूरे राज्य में ख़ुशी की लहर है. कैसे मिला Idea? तेजस्विनी को पहली ब...